PM बनते बनते रह गए थे मुलायम सिंह यादव,सालों बाद बया किया अपना दर्द

भारतीय राजनेता मुलायम सिंह यादव राजनीती में आने से पहले शिक्षक के रूप में कार्य करते थे. इसके आलावा मुलायम सिंह  प्रशिक्षित पहलवान भी हैं . मुलायम सिंह ने कभी नहीं सोचा था कि वह राजनीति में में कदम रखेंगे. सर्वश्री मधु लिमये, राज नारायण, राम सेवक यादव के साथ रहने की वजह से मुलायम भी राजनीति में आगये.जिसके बाद वो विधायक, सांसद और उत्तर प्रदेश के सीएम बन गए.अपने राजनीतिक करिये में नौ बार जेल गये मुलायम के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें सबकी सहमति से पीएम पद का उम्मीदवार भी मान लिया था .

इतना ही नहीं मुलायम सिंह यादव के शपथ ग्रहण का समय तक भी तय हो चुका था। साल 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान ‘न्यूज़18 यूपी’ से बात करते हुए खुद उन्होंने ये किस्सा सुनाया था। मुलायम से सवाल पूछा गया था, ‘जैसे ही प्रधानमंत्री पद का नाम आता है आप पीछे हट जाते हैं। आपको मानने में क्या गुरेज़ है?’ इसके जवाब में मुलायम सिंह यादव मुस्कुराने लगते हैं और थोड़ा पीछे की घटना सुनाते हैं।

पीएम नहीं बनने पर नहीं कोई दुख:

मुलायम कहते हैं, ‘एक घटना हो चुकी है। हम प्रधानमंत्री बन चुके। तय हो गया कि सुबह आठ बजे शपथ होनी है। बाद में मामला पूरा बिगड़ गया। मैंने तो इसमें कोई बुरा नहीं माना। क्या मैं निराश हुआ हूं? क्या आपको अंदाजा है कि हमारे घर पर कितनी भीड़ थी? हजारों समर्थक और सारी दुनिया की प्रेस हमारे घर पर पहुंच गई थी। मुझे तो कभी दुख भी नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री नहीं बन सका।’

अपनी बात को आगे बताते हुए मुलायम कहते हैं इसके बाद और भी बड़ा काम हुआ अब वो नेता तो जिन्दा भी नहीं हैं। मेरे पीछे फैसला कर लिया। इसमें ज्योति बसु और फारूक अब्दुल्ला समेत कई नेता थे कि अगर मुलायम प्रधानमंत्री बने तो डिप्टी पीएम हम बनेंगे। सब तय हो गया और हमें कोई पता नहीं। इन्होंने हमें धोखा नहीं दिया बल्कि खुद धोखा खा गए। इन नेताओं का आधार ही खत्म हो गया। हमें तो अब कोई प्रधानमंत्री बनने की इच्छा भी नहीं रही है।’

बता दें, 1996 में एच डी देवगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने थे . देवगौड़ा की मिली-जुली सरकार थी। बीजेपी के समर्थन से बनी इस सरकार में मुलायम सिंह यादव को भी अहम मंत्रालय दिया गया था। वह देश के रक्षा मंत्री बने थे। हालांकि ये सरकार लंबे समय तक नहीं चल सकी।

देवगौड़ा के नाम पर मुहर लगने से पहले मुलायम का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया था। बताया जाता है कि लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके नाम पर सहमति नहीं दी, जिसकी वजह से मुलायम पीएम बनते-बनते रह गए थे। देश में 1998 में दोबारा चुनाव हुए और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे।

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