महिला अफसर को अश्लील संदेश भेजते थे पंजाब के नए CM, विवादों से रहा है पुराना नाता

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जो रहे है वैसे वैसे चुनाव से संबंधित खबरे भी चर्चा में आने लगी। आपको बता दें अभी हालही में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह काफी सुर्खियों में रहे है, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर ऐसी बात कही थी, जिसे सुनकर सभी सोच में पड़ गये थे। वहीं अब पंजाब  में कांग्रेस के भीतर लंबे समय तक चली तनातनी और अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी विधायक दल का नया नेता चुना गया। जिनको लेकर इन दिनों काफी बवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि एक महिला अफसर को अश्लील संदेश भेजते थे पंजाब के नाए CM, इनका विवादों से पुराना नाता रहा है। आइए जाने आखिर क्या है इसका सच।

दरअसल आज हम जिनकी बात कर रहे है, उन्होंने राज्य के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, वह पंजाब के पहले दलित नेता हैं, जो राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, 58 साल के चन्नी दलित सिख समुदाय से आते हैं और अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे, वह रूपनगर जिले के चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, वह इस क्षेत्र से साल 2007 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद लगातार जीत दर्ज की, वह शिरोमणि अकाली दल-BJP गठबंधन के शासनकाल के दौरान साल 2015-16 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी थे। चन्नी वरिष्ठ सरकारी पदों पर अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व जैसे दलितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं, उनकी राजनीतिक यात्रा 2002 में खरार नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के साथ शुरू हुई, चन्नी ने पहली बार 2007 में निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से जीते, वह 2012 में कांग्रेस में शामिल हुए और फिर से उसी सीट से विधायक चुने गए।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान चन्नी उस समय विवादों में घिर गए जब भारतीय प्रशासनिक सेवा की एक महिला अधिकारी ने उन पर 2018 में ”अनुचित संदेश” भेजने का आरोप लगाया था, इसके बाद पंजाब महिला आयोग ने मामले पर सरकार का रुख पूछा था, उस समय मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने चन्नी को महिला अधिकारी से माफी मांगने के लिए कहा था और यह भी कहा था कि उनका मानना है कि मामला ”हल” हो गया है। आपको बता दें कि साल 2018 में चन्नी फिर से विवादों में फंसे, जब वह एक पॉलिटेक्निक संस्थान में लैक्चरर के पद के लिए दो उम्मीदवारों के बीच फैसला करने के लिए एक सिक्का उछालते हुए कैमरे में कैद हो गए,

इससे अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा, नाभा के एक व्याख्याता और पटियाला के एक व्याख्याता, दोनों पटियाला के एक सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान में तैनात होना चाहते थे। कहा जाता है कि चन्नी ने सियासत में कामयाबी के लिए हाथी की सवारी भी की, ज्योतिषी ने कहा था कि अगर वो ऐसा करते हैं तो पंजाब के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। चन्नी से एक और विवाद पीएचडी के एंट्रेस को लेकर जुड़ा हुआ है, साल 2017 में चन्नी ने पीएचडी का एंट्रेंस दिया था, उस वक्त आरोप लगया गया था कि चन्नी को फायदा पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी ने SC-ST उम्मीदवारों को नियमों में छूट दी, हालांकि चन्नी एंट्रेंस पास नहीं कर सके थे। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है? मित्रों अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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