मां रहे करीब इसलिए बेटे ने मंदिर में स्थापित कर दी प्रतिमा, खुद लिखी आरती, अब ‘गीता की क्‍लास’की तैयारी

मित्रों अक्‍सर देखा जाता है, कि अपने बच्‍चों की परवरिश में उनके माता पिता कोई कमी नही छूटने देते है, और उनका अच्‍छे से ध्‍यान रखने में हमेसा सजग रहते है, और वह अपने बच्‍चे से संबंधित छोटी से छोटी आवश्‍यकताओं को पूरा करने की कोशिश में लगे रहते है। वहीं जब बच्चे बड़े हो जाते है तो उन्हीं बच्चों को माँ–बाप ही बोझ लगने लगते है। आप लोगों ने कई ऐसी घटनायें देखी होगी जिसमे अपने बूढ़े मॉ-बाप को वृद्धाश्रम के सहारे छोड़ा गया है, पर आज हम एक ऐसे बेटे के संबंध में बताने वाले है, जिसने अपनी माँ को हमेशा अपने पास रखने के लिये मन्दिर में स्थापित कर दी प्रतिमा, यहां तक की खुद ही लिखी आरती। आइए इस महान शख्स के संबंध में जानते है।

आपको बता दें कि  बिछिया कैंप के रहने वाले राहुल सिंह की मां गीता सिंह का निधन को-रोना संक्रमण के चलते बीते 14 मई को हो गया। गीता देवी की असमय मौत से पति उमेश सिंह व उनके बेटों राहुल व वैभव के लिए बड़े सदमे की तरह थी। कई दिन तक गुमसुम रहने के बाद भाइयों ने निर्णय लिया कि मां ताउम्र करीब रहे, इसलिए भगवान के साथ मंदिर में मां की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। जयपुर में निजी बैंक में कार्यरत वैभव सिंह ने संगमरमर की प्रतिमा बनवाने की पहल की। वैभव बताते हैं कि ढाई महीने लगातार मूर्तिकार के पास जाता था। ताकि मां का अक्स प्रतिमा में साफ दिखे। ढाई फुट की प्रतिमा तैयार हुई तो लगा मां सामने बैठी है। प्रतिमा की कीमत के सवाल को नकारते हुए राहुल कहते हैं कि मंदिर में ही मां की प्रतिमा स्थापित की गई है। मां की मूर्ति मुझे शक्ति और उनके प्रति प्रेम का अहसास देती है। माता-पिता का स्थान भगवान से भी ऊपर है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यह सिर्फ किताबी बात नहीं है। बहू प्रीति सिसोदिया कहती हैं कि मां कभी सास की भूमिका में नहीं दिखीं। मंदिर में उनकी आराधना से अहसास रहता है कि मां का आशीर्वाद परिवार के साथ है। बिछिया कैंप में अकोलवा के पास माता-पिता का मंदिर भी स्थापित है। डॉ. शिवानंद श्रीवास्तव और उनके भाइयों ने पिता जगदंबा लाल श्रीवास्तव और मां प्रभावती देवी की याद में पांच साल पहले करीब 15 लाख की लागत से मंदिर का निर्माण कराया है। डॉ. शिवानंद बताते हैं कि मंदिर में सुबह-शाम पूजा होती है। मंदिर की स्थापना से कभी लगा ही नहीं कि माता-पिता हमारे बीच नहीं हैं। पीढ़ियां माता-पिता का सम्मान करें, मंदिर इसी संदेश के साथ स्थापित किया है।

शिक्षक पुत्र राहुल ने अपनी मां पर आरती लिखी है, जो सुबह-शाम मंदिर में बजती है। आरती को सुर गायिका अर्पिता उपाध्याय ने दिया है। राहुल बताते हैं कि गीता मां की आरती की कॉपीराइट की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। जल्द ही गरीब बच्चों को बेहतर कोचिंग के लिए गीता मां की क्लास शुरू करेंगे। इस संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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