UP में अब दहेज नही ले पाएंगे सरकारी कर्मचारी, योगी सरकार ने बनाया कानून

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि हमारे देश में ऐसे-ऐसे दिग्गज नेताओं का दौर रहा है जो कि अपने कार्य क्षेत्र में योगदान देकर अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुये जनता की उम्मीदों पर खरे उतरने का काम किया हैं। जैसा कि आप जानते है कि इस समय BJP सरकार में उत्तर प्रदेश की बाग-डोर योगी आदित्य नाथ को दी गई है जो कि वो काफी अच्छे से संभाल रहे है। सीएम योगी के यूपी में सत्ता संभालने पर एक के बाद एक कई बड़े फैसले लिये गये है, जो कि सराहनीय है। इसी क्रम में इन दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार ने दहेज को लेकर अभियान छेड़ दिया है। जिसके अन्तर्गत UP में अब दहेज नही ले पाएंगे सरकारी कर्मचारी।   

दरअसल नाये नियम के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों को अब यह घोषणा करनी होगी कि उन्होंने अपनी शादी में दहेज लिया है या नहीं। ये आदेश खासकर 31 अप्रैल 2004 के बाद शादी करने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा और उन्हें इसका शपथ पत्र देना होगा, राज्य सरकार के आदेश के तहत शपथ पत्र न देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी की जाएगी। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के कर्मचारियों को 18 अक्टूबर तक ये जानकारी शपथ पत्र के तौर पर दिए गए सरकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, ये आदेश राज्य के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, इस आदेश के बाद सभी विभागों को शपथ पत्र कंपाइल कर अपलोड करना होगा, फिलहाल शासन की ओर से जारी आदेश के बाद विभागों में खलबली मच गई है, अधिकांश घोषणा पत्रों में दहेज का उल्लेख नहीं है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि महिला कल्याण निदेशक उत्तर प्रदेश लखनऊ ने सभी विभागाध्यक्षों को जारी पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश दहेज निषेध नियमावली, 1999 को प्रदेश सरकार ने दहेज प्रथा को रोकने के उद्देश्य से लागू किया है, समाज में दहेज एक बुराई है और इसे खत्म करने की पहल करनी होगी, क्योंकि ये एक सामाजिक बुराई है, असल में नियमावली में 31मार्च, 2004 को उत्तर प्रदेश दहेज प्रतिषेध नियमावली, 2004 में पहला संशोधन किया गया था, इसके तहत नियम 5 में यह प्रावधान किया गया था कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी अपनी शादी के समय अपने नियुक्त अधिकारी को एक स्व-हस्ताक्षरित घोषणा करनी होगी, जिसमें वह ये घोषणा करेगा कि उसने अपनी शादी में कोई दहेज नहीं लिया है

असल में राज्य दहेज के खिलाफ कानून पहले से ही मौजूद है, लेकिन राज्य सरकार ने इसमें संशोधन किया था, राज्य सरकार ने 31 मार्च, 2004 को उत्तर प्रदेश दहेज प्रतिषेध नियमावली, 2004 में पहला संशोधन किया गया था, जिसके बाद सरकार 31 अप्रैल 2004 के बाद नियु्क्त कर्मचारियों पर इसे लागू किया है, हालांकि ये नियम उससे पहले के कर्मचारियों पर भी लागू है, इसके साथ ही अगर किसी कर्मचारी, अधिकारी के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज है तो उसे उसका पूरा ब्योरा भी देना होगा, इसके साथ ही कर्मचारियों को अपने शपथ पत्र में शादी की तारीख, वैवाहिक स्थिति, मोबाइल नंबर और विभाग में उसकी नियुक्ति का प्रकार, यानी वह एक स्थायी या संविदा कर्मचारी है, इसकी भी जानकारी देनी होगी।

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